ऐ, ज़िन्दगी तू बहुत आसाँ है

ऐ, ज़िन्दगी तू बहुत आसाँ है,
   मैं ही तुझे उलझाये जा रहा हूँ।
चार दिन की है तू,
  मैं भूले जा रहा हूँ।
अपने अहम् के तले ,
  तुझे कुचले जा रहा हूँ।
जो ऐब खुद में है
   औरो में ढूंढे जा रहा हूँ।
इस से पहले कोई मुझे टोके,
मैं ही नुक्ता-चीनी करे जा रहा हूँ।
अपनी ग़लत बात भी सही,
औरो की अच्छी बात भी ग़लत माने जा रहा हूँ।
रूठटा हूँ ऐसे ज़िन्दगी भर,
बात ना करने की कसम खाये जा रहा हूँ।
ऐ, ज़िन्दगी तू बहुत आसाँ है,
मैं ही तुझे उलझाये जा रहा हूँ।

         -  सैय्यद फ़िरोज़ ज़ैनवी

DRDO begins bidding process for Fighter Jets to be made in India

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छोटी सी भूल से 20 करोड़ की चपत

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अहम् फैसले कैसे लें

यूँ तो आप रोज़ ढेरो फैसले लेते हैं जैसे कि लंच में क्या खाना है या दोस्त की शादी में कैब से जाना है या अपनी गाड़ी से। यह सारे आम फैसले हैं क्योंकि इनके ग़लत हो जाने पर आपके जीवन पर असर नहीं पढता।

ज़िन्दगी के कुछ फैसले अहम् होते हैं जैसे कि जीवन-साथी या पेशे का चयन, ज़मीन -जायदाद खरीदना वग़ैरह वग़ैरह।

यह फैसले अहम् होते हैं क्योंकि यह फैसले आप ज़िन्दगी में बार-बार नहीं लेते और इनके ग़लत होने से आपके जीवन पर गंभीर नकारात्मक  प्रभाव पढता है।

इसलिए यह अहम् फैसले कभी भी जल्दबाज़ी या जज़्बाती होकर नहीं लेने चाहिये। यह फैसले बहुत सोच समझ कर लेने चाहिये। आप इन फैसलो में दूसरों
से राय ले सकते हैं मगर कभी भी दूसरो से प्रभावित होकर फैसले न लें। हर इंसान अलग है, यहाँ तक की दो सगे भाई भी। जो फैसला एक के लिए सही है, ज़रूरी नहीं कि और किसी के लिए भी सही हो।

यह बातें ना सिर्फ सोलह आने सच हैं बल्कि मेरे अनुभवों में भी खरी उतरी हैं।

अतः अहम् फैसले जल्दबाज़ी या जज़्बाती होकर ना लें।

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